Aesthetic Blasphemy

a million little things...

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imagining familiarity

मैं तो मर जाऊं अगर सोचने लग जाऊं उसे, और वोह कितनी सहूलत से मुझे सोचती है, कितनी खुश-फहम है वो शख्स के हर मौसम ...

Posted on: Feb. 16, 2014 Read More
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moh-maya

प्राण न पागल हो तुम यों, पृथ्वी पर वह प्रेम कहाँ.. मोहमयी छलना भर है, भटको न अहो अब और यहाँ.. ऊपर को निरखो अब तो बस...

Posted on: Feb. 16, 2014 Read More
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Butterflies

मैं फूल टाँक रहा हूँ तुम्हारे जूड़े में, तुम्हारी आँख मसर्रत से झुकती जाती है, न जाने आज मैं क्या बात कहने वाला...

Posted on: Feb. 16, 2014 Read More
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To each his own!

मियां मैं शेर हूँ, शेरो की गुर्राहट नहीं जाती, मैं लहज़ा नरम भी कर लू, तो झिन्झालाहत नहीं जाती | मैं एक दिन बेखयाली...

Posted on: Feb. 16, 2014 Read More