Aesthetic Blasphemy

a million little things...

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moh-maya

प्राण न पागल हो तुम यों, पृथ्वी पर वह प्रेम कहाँ.. मोहमयी छलना भर है, भटको न अहो अब और यहाँ.. ऊपर को निरखो अब तो बस...

Posted on: Feb. 16, 2014 Read More