उस रोज़ जब तुम नहीं थीं, मेरी सुबह बड़ी अजीब बीती | जो आदतें तुम्हारे होने की वजह से मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गयीं हैं, तुम्हारे न होने से वह आदतें बेमानी सी हो गयीं | थोड़ा समय और बीता तो दिन आगे बढ़ गया, और दिन के साथ साथ मैं भी | लेकिन, वह सुबह नहीं भूली | तुम जो आ गयी हो, अब सब पहले जैसा है, सिवाय उस सुबह के | 

कल दफ्तर जाते समय घड़ी बांधना भूल गया | पूरे दिन बांह को धीरे से झटक कर, शर्ट के कफ को पीछे कर के, कोरी कलाई को रह रह कर देखता रहा | हर बार याद आ जाता - "आज घड़ी भूल गया" | उसी के साथ याद आ जाती वही सुबह, जब तुम नहीं थीं | 

Sketch of a stick figure carrying a torch and tied to a heart shaped baloon floating in the sky
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